Palitana 5 Chaityavandan In Hindi Exclusive Full

णमो अरिहंताणं, णमो सिद्धाणं, णमो आयरियाणं, णमो उवज्झायाणं, णमो लोए सव्व साहूणं।

गहन अध्ययन: कुछ आगमों के अनुसार, ये पाँच चैत्यवंदन (च्यवन, जन्म, दीक्षा, केवलज्ञान, मोक्ष) के प्रतीक हैं।

भाव धरीने जे चढे, तेने भवपार उतारे।

जैन धर्म के सबसे पवित्र तीर्थस्थलों में से एक है। ऐसा माना जाता है कि यहाँ के दर्शन मात्र से ही जीव को मोक्ष की प्राप्ति होती है। पालीताना की यात्रा पर जाने वाले प्रत्येक श्रद्धालु के लिए 'पाँच चैत्यवंदन' (5 Chaityavandan) का विशेष महत्व है। यह प्रतिदिन पढ़े जाने वाले चैत्यवंदन से थोड़ा भिन्न होता है और विशेष रूप से शत्रुंजय जैसे प्राचीन तीर्थों के लिए निर्धारित है। palitana 5 chaityavandan in hindi full

णमो णमो णमो जिणाणं, जिणवर चरण कमल मणिरंजित माणं। उप्पन्न चउव्वीसं, अज्जभवि चउव्वीसं। आगामि चउव्वीसं, तच्च चउ दस साहुणं... (लघु रूप में) - णमो णमो अरिहंताणं भगवंताणं जिणाणं केवलिाणं सव्वदुक्ख प्रहाणयाणं।

मृगलांछन जिन आयु, लाख वर्ष प्रमाण;

प्रत्येक चैत्यवंदन के अंत में भक्त तीन सूत्रों का एक साथ पाठ करते हैं: लाख वर्ष प्रमाण

पूर्ण 5 चैत्यवंदन पाठ (हिंदी अर्थ और भावार्थ सहित)

पांच कोड़ी मुनींद्र साथ, अनशन वहाँ कीध;

यह यात्रा का मुख्य और अंतिम चैत्यवंदन है, जो पालिताना के विशाल मुख्य मंदिर में विराजमान मूलनायक 'आदिनाथ दादा' (ऋषभदेव) के सम्मुख भावपूर्वक किया जाता है। अनशन वहाँ कीध

मैं सिद्ध परमात्माओं को नमस्कार करता हूँ, जो संसार से परे (सिद्धशिला) में निवास करते हैं। जिनकी सिद्धि एक साथ (क्षयोपशम से नहीं, पूर्ण क्षय से) हुई है, जो पूर्णतया वीतराग हैं तथा जिनकी आत्मा अमृत रस से पूर्ण है।

यह अंतिम चैत्यवंदन उन अनगिनत मुनियों और आत्माओं को समर्पित है जिन्होंने इस पर्वत के कण-कण से मोक्ष प्राप्त किया है।